Wednesday, December 07, 2011

मेरी कविताये:- कल का सपना आज की हकीकत

चाहता हूँ कुछ गुजरे पल, बस मेरी ज़िन्दगी बन जाये,
कल रात का कोई ख्वाब, आज हकीकत में बदल जाये !

पानी पे चलने का हुनर , कल मुझको भी आ गया है ,
कोई जाये और ये बात , उन फरिश्तों को भी समझाए !

अपना ही पुराना चेहरा , अब याद भी नहीं आता ,
कोई नयी महक उठे , और मेरे बाग़ को फिर महकाए !

दरिया के बीच में खड़ा होकर , दिल सोचने लगा फिरसे ,
किश्ती को किनारे लगा दूँ , की यहीं डुबो दिया जाये !!

"भुमिपुत्र"

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