साँस अगर लेता हूँ तो महक उसकी ही आती है
साँस अगर न लूँ तो बस जान निकल जाती है !
बड़ी मुश्किल में हूँ क्या करूँ समझ नही आता
वो बहुत दूर है मुझसे मगर याद बहुत आती है !!
आँखें अगर खोलूं तो नज़र बस वही आती है
आँखें जो बंद रखूं तो कसक और बढ़ जाती है !
बड़ी मुश्किल में हूँ क्या करूँ समझ नही आता
वो सामने नही है मगर हर जगह दिख जाती है !!
बात अगर करता हूँ तो आवाज़ उसकी ही आती है
में सुनु या ना सुनु बहुत उलझन सी हो जाती है !
बड़ी मुश्किल में हूँ क्या करूँ समझ नही आता
वो तनहाइयों में मुझको हर लम्हा सताती है !!
अशक़ अगर गिरते हैं तो बस बाढ़ सी आती है
अशक़ अगर ना गिरें तो पलकें ही फट जाती है !
बड़ी मुश्किल में हूँ क्या करूँ समझ नही आता
वो दील तो कबका ले चुकी अब बस रूह ही बाकी है !!
"भूमिपुत्र "
Tuesday, September 29, 2009
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